पहला चरण मन और व्यय पर, दूसरा स्वयं के स्वास्थ्य-स्वभाव पर और तीसरा कुटुंब तथा वाणी पर प्रभाव डालता है। फल इस बात से तय होता है कि शनि आपकी कुंडली में योगकारक है या मारक, और चंद्रमा कितना बलवान है। वृषभ, तुला, मकर और कुंभ राशियों के लिए शनि प्रायः सौम्य रहता है। स्मरण रखिए - शनि छीनता वही है जो अनुचित रीति से जुड़ा हो, और देता वह है जो परिश्रम से मांगा जाए। साढ़ेसाती में अनुशासन, सेवा और हनुमान-आराधना - यही त्रिसूत्र है।
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