पं. नर्मदेश्वर शास्त्री

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मंगल दोष कब लगता है और कब भंग होता है? जानिये पूरा सत्य

सीधा उत्तर पहले: मंगल दोष तब लगता है जब जन्मकुण्डली में मंगल लग्न से प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम अथवा द्वादश भाव में स्थित हो, और यही गणना चन्द्रमा तथा शुक्र से भी की जाती है। परन्तु यही दोष अनेक स्थितियों में भंग भी हो जाता है – मंगल जब अपनी राशि में हो, उच्च का […]

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विवाह में देरी के 5 ज्योतिषीय कारण और उपाय – कुण्डली में कहाँ देखें?

सीधा उत्तर पहले: कुण्डली में विवाह में देरी का भेद पाँच स्थानों पर खुलता है – सप्तम भाव, सप्तमेश, शनि का प्रभाव, विवाह-कारक ग्रह और दशा का द्वार। आइये, एक-एक को उसी क्रम से समझते हैं जिस क्रम से मैं स्वयं किसी कुण्डली में देखता हूँ। परन्तु पहले एक बात गाँठ बाँध लीजिये – देरी

जन्मकुण्डली के बारह भाव — लग्नेश का प्रभाव दर्शाता ज्योतिषीय चित्र
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लग्नेश का बारहों भाव में प्रभाव :​

लग्नेश का बारहों भाव में प्रभाव : लग्नेश पहले भाव में जीवन-कोड : “आप अपने जीवन की कहानी खुद लिखते हैं। आपके निर्णय, आपका दृष्टिकोण, और आपकी सोच-ये तीनों मिलकर आपके भाग्य को गढ़ते हैं। आप बाहरी हालात के शिकार नहीं हैं, बल्कि अपने कर्मों के निर्माता हैं। जिस तरह एक लेखक अपने पात्रों की

राहु ग्रह का प्रतीकात्मक ज्योतिषीय चित्र
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राहु जिस भाव में हो :

राहु जिस भाव में हो : राहु जिस भाव में हो, वहाँ व्यक्ति भविष्य से आगे सोचता है वो भाव आपका “innovation lab” बन जाता है – वहीँ से करियर या जीवन में छलाँग लगती है। क्या आपने कभी गौर किया है कि आपके जीवन का एक विशेष क्षेत्र ऐसा है जहाँ आपकी सोच हमेशा

राशि-चक्र — बारह राशियों का ज्योतिषीय चित्र
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नक्षत्र जन्म फल :

नक्षत्र जन्म फल : अश्वनी नक्षत्र : धनी, हंसमुख, सुंदर, बुद्दिमान, अच्छी पोशाक, आभूषण पहनने का शौक़ीन, गठीला शरीर, जनप्रिय | हर काम में होशियार | परोपकारी, यशस्वी, वाहन एवं नौकर युक्त| भाग्योदय २० वर्ष बाद , यशस्वी, एश्वर्य संपन्न, नम्र स्पष्ट वक्ता अस्थिर चरित्रवान | स्वार्थपूर्ति के लिए विश्वासघात भी कर ले | क्रूर

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