पं. नर्मदेश्वर शास्त्री

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कुण्डली मिलान में 36 गुण मिलने पर भी विवाह असफल क्यों होता है?

सीधा उत्तर पहले: छत्तीस गुणों का मिलान वस्तुतः केवल चन्द्रमा की परीक्षा है, सम्पूर्ण कुण्डली की नहीं। अष्टकूट के आठों कूट वर और वधू के जन्म-नक्षत्र तथा चन्द्र राशि से ही बनते हैं, अर्थात् नौ ग्रहों में से केवल एक ग्रह कसौटी पर चढ़ता है। शेष आठ ग्रह, बारहों भाव, लग्न, सप्तमेश, नवांश और दशा-क्रम […]

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ज्योतिष उपाय कैसे काम करते हैं? रत्न, मंत्र और दान

रत्न, मंत्र और दान टोटके नहीं, कर्म-सिद्धांत के तीन शास्त्रोक्त द्वार हैं - रत्न शुभ ग्रह को बल देता है, मंत्र चित्त को अनुकूल करता है और दान पीड़क ग्रह की ऊर्जा का विसर्जन करता है। किन्तु वास्तविक विद्या यह निर्णय है कि कुंडली में कौन ग्रह शुभ है और कौन अशुभ - बिना भय, बिना चमत्कारी दावों के शास्त्रोक्त तर्क यहाँ समझें।

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नवांश कुंडली क्या है? वर्गोत्तम ग्रह और नवांश देखने की विधि

नवांश कुंडली (D-9) जन्मकुंडली का नौवाँ वर्ग है। 3°20′ की गणना-विधि, वर्गोत्तम ग्रह का बल, विवाह और दशा-फल में नवांश की भूमिका तथा नवांश देखने का शास्त्रीय क्रम - सरल हिन्दी में, प्रमाण-सहित।

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दशम भाव से करियर: नौकरी या व्यापार? कुंडली से जानें

कुंडली से करियर देखने की शास्त्रोक्त विधि - दशम भाव, दशमेश और नवांश। नौकरी या व्यापार का निर्णय किन भावों के बल से होता है और दशा-गोचर से सही समय कैसे चुनें - सरल हिन्दी में, प्रमाण-सहित, बिना भय के।

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राशि और लग्न में अंतर: राशिफल किस राशि से पढ़ें?

लग्न, चंद्र राशि और नाम राशि में क्या अंतर है और दैनिक राशिफल किस राशि से पढ़ना चाहिए? काशी की शास्त्र-परंपरा के आलोक में सरल, प्रमाण-सहित उत्तर - बिना भय, केवल गणित और विवेक के साथ।

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शनि की साढ़ेसाती के तीन चरण क्या हैं और किस चरण में क्या फल मिलता है?

सीधा उत्तर पहले: शनि की साढ़ेसाती जन्म के चन्द्रमा की राशि से बारहवीं राशि, फिर उसी चन्द्र राशि, और फिर उससे दूसरी राशि पर शनि के भ्रमण का कुल साढ़े सात वर्ष का काल है। पहला चरण देह, व्यय और निद्रा को छूता है, दूसरा चरण मन तथा निर्णय-शक्ति को, और तीसरा चरण धन, कुटुम्ब

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मंगल दोष कब लगता है और कब भंग होता है? जानिये पूरा सत्य

सीधा उत्तर पहले: मंगल दोष तब लगता है जब जन्मकुण्डली में मंगल लग्न से प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम अथवा द्वादश भाव में स्थित हो, और यही गणना चन्द्रमा तथा शुक्र से भी की जाती है। परन्तु यही दोष अनेक स्थितियों में भंग भी हो जाता है – मंगल जब अपनी राशि में हो, उच्च का

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विवाह में देरी के 5 ज्योतिषीय कारण और उपाय – कुण्डली में कहाँ देखें?

सीधा उत्तर पहले: कुण्डली में विवाह में देरी का भेद पाँच स्थानों पर खुलता है – सप्तम भाव, सप्तमेश, शनि का प्रभाव, विवाह-कारक ग्रह और दशा का द्वार। आइये, एक-एक को उसी क्रम से समझते हैं जिस क्रम से मैं स्वयं किसी कुण्डली में देखता हूँ। परन्तु पहले एक बात गाँठ बाँध लीजिये – देरी

जन्मकुण्डली के बारह भाव — लग्नेश का प्रभाव दर्शाता ज्योतिषीय चित्र
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लग्नेश का बारहों भाव में प्रभाव :​

लग्नेश का बारहों भाव में प्रभाव : लग्नेश पहले भाव में जीवन-कोड : “आप अपने जीवन की कहानी खुद लिखते हैं। आपके निर्णय, आपका दृष्टिकोण, और आपकी सोच-ये तीनों मिलकर आपके भाग्य को गढ़ते हैं। आप बाहरी हालात के शिकार नहीं हैं, बल्कि अपने कर्मों के निर्माता हैं। जिस तरह एक लेखक अपने पात्रों की

राहु ग्रह का प्रतीकात्मक ज्योतिषीय चित्र
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राहु जिस भाव में हो :

राहु जिस भाव में हो : राहु जिस भाव में हो, वहाँ व्यक्ति भविष्य से आगे सोचता है वो भाव आपका “innovation lab” बन जाता है – वहीँ से करियर या जीवन में छलाँग लगती है। क्या आपने कभी गौर किया है कि आपके जीवन का एक विशेष क्षेत्र ऐसा है जहाँ आपकी सोच हमेशा

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